भारत पाकिस्तान ताल्लुकात की जटिल गुथ्थियां

(प्रभात कुमार रॉय)

भारत और पाकिस्तान के ताल्लुकात पर सोचते समझते हुए प्रायः कुरुक्षेत्र का महाभारत युद्ध सामने उपस्थित हो जाता है, जहांकि भाई के विरुद्ध भाई युद्धरत रहा और विजय हासिल करने की खातिर प्रत्येक तरह की जानलेवा कूटनीतिक चालबाजियां अंजाम दी जाती रही। सन् 1947 से आज तक भारत और पाकिस्तान भी महाभारत युद्ध को ही अनेक रुपों में निरंतर दोहराते रहे हैं, जहाँ भाई के विरुद्ध भाई किसी ना किसी तौर पर मैदान-ए-जंग में सक्रिय रहा है। पाकिस्तान के  गृहमंत्री रहमान मलिक ने दिल्ली की धरती पर कदमपोशी करते हुए पुरअसर अंदाज में अपने जज्बात पेश किए कि वह पाकिस्तान के अवाम की तरफ से पैगाम ए अमन लेकर आए हैं तो पेशकश वास्तव में एक सुखद पैगाम की तरह प्रतीत हुई। उन्होंने फरमाया कि पाकिस्तान भारत के साथ शांति प्रक्रिया को संजीदगी से आगे बढ़ाना चाहता है। मुंबई दहशतगर्द हमले के आतंकवादियों के बरखिलाफ कार्यवाही अंजाम के विषय में जनाब रहमान मलिक ने कहा कि दहशतगर्दी का दर्द हमसे ज्यादा कोई भी नहीं जानता और  पाकिस्तान किसी भी तहकीकात में सहयोग प्रदान करने के लिए तत्पर हैं। उल्लेखनीय है कि अब तक पाकिस्तान की सरजमीं पर तकरीबन चालीस हजार बेगुनाह लोग दहशतगर्दो के हाथों हलाक किए जा चुके और दहशतगर्दी से तकरीन सौ अरब डालर की आर्थिक क्षति पाकिस्तान को हो चुकी है। पाकिस्तान का खैबर पख्तून और बिलोचिस्तान इलाका तालीबान दहशगर्दो के आधिपत्य में छटपटा रहा है। एक तरफ विश्व रंगमंच पर पाकिस्तान के हुक्मरान आतंकवाद से जूझने का जोरदार अहद ले रहे है, किंतु दूसरी तरफ पाखंडपूर्ण रुप से कश्मीर में दहशतगर्दी को बाकायादा इमदाद फराहम कराने की साजिश के तहत पाक अधिकृत कश्मीर में दहशतगर्दो के छापामर प्रशिक्षण शिविर संचालित कर रहे हैं। जिस वक्त पाकिस्तान के गृह मंत्री जनाब रहमान मलिक हिंदुस्तान में मौजूद थे और भारतीय मेहमान नवाजी का लुत्फ उठा रहे थे, ठीक उसी वक्त सात सदस्यीय कश्मीरी शिष्टमंडल इस्लामाबाद तशरीफ ले गया। हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूक को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ की तरफ से बाकायदा आश्वासन प्रदान किया गया कि कश्मीरियों के कथित आत्मनिर्णय के अधिकार को पाकिस्तान बदस्तूर नैतिक और कूटनीतिक हिमायत प्रदान करता रहेगा।  

 

गृहमंत्री रहमान मलिक ने अपने  भारत दौरे के दौरान जिस कोटि के बयानात पेश किए, उससे दोनों मुल्कों के मध्य बेहतर ताल्लुकात बनाने में इमदाद नहीं मिली। भारत की सरजमीं पर पैर रखते ही रहमान मलिक ने मुंबई पर आतंकी आक्रमण और अयोध्या का विवादित ढांचा गिराने की घटनाओं के मध्य गैरवाजिब तुलना पेश करके खुशनुमा माहौल में अनावश्यक तौर पर तल्खी पैदा कर दी। अयोध्या की वारदात भारत का एकदम अंदरुनी मामला रहा, जिस पर रहमान मलिक को किसी तरह की बयानबाजी करने का कदाचित हक़ हासिल नहीं है। मुंबई पर हमले के मुख्य मुलजिम मौहम्मद हाफिज सईद के बारे में रहमान मलिक का कहना हकीकत से दरअसल मुंह फेर लेना है कि भारत ने इस मामले में अभी तक ठोस सबूत नहीं पेश किए। मुंबई पर दहशतगर्द आक्रमण के लिए जिम्मेदार दहशतगर्दो की आवाज के नमूने मुहैया कराने में पाकिस्तान की तरफ से मुसलसल आनाकानी की जाती रही है। यदि पाकिस्तान वस्तुतः दहशतगर्दो को इंसाफ के कठघरे में खड़ा करने के लिए प्रतिबद्ध है तो उसे आवाज के नमूने देने में एतराज क्योंकर है? हकीकत है कि आवाज के नमूने मुहैया कराने पर पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई के उन अफसरान के किरदारों का पर्दाफाश हो जाएगा, जो पाकिस्तान स्थित कंट्रोल रूम से मुंबई में आतंकवादियों को लगातार निर्देशित कर रहे थे। भारत-पाकिस्तान के मध्य अविश्वास की खाई तब तक बरकरार रहेगी, जब तक 26 /11 के लिए उत्तरदायी तमाम दहशतगर्दो को सख्त सजाएं नहीं दी जाती। भारतीय प्रधानमंत्री का पाकिस्तान दौरा भी इसी बात पर निर्भर करेगा कि पाकिस्तान में जारी इंसाफ की समस्त प्रक्रिया को किस अंदाज से आगे बढ़ाया जाता है। रहमान मलिक का यह बयान भी गुमराह करने वाला रहा कि आतंकी अबु जुंदाल भारतीय खुफिया एजेंसी का एजेंट था। हकीकत है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी द्वारा अबु जुंदाल को पाकिस्तानी पासपोर्ट उपलब्ध कराकर उसका भारत के खिलाफ सदैव इस्तेमाल किया गया। रहमान मलिक की कूटनीतिक चालों से प्रतीत होता है कि वह मुंबई पर हमले के लिए उत्तरदायी रहे दहशतगर्दो को बचाने की पुरजोर कोशिश अंजाम देते रहे हैं। पाकिस्तान के गृह मंत्री कदाचित आश्वस्त नहीं कर सके कि मुस्तकबिल में ऐसी आक्रमणों की पुनरावृत्ति नहीं होगी। सवाल यह उठता है कि क्या गृहमंत्री रहमान मलिक भारत-पाकिस्तान ताल्लुकात को बेहतर बनाने के बजाय अधिक बिगाड़कर चले गये? रहमान मलिक तशरीफ लाए थे, वस्तुतः भारत-पाक वीजा समझौते को अंजाम देने की खातिर, लेकिन कूटनीतिक बातचीत दरअसल मुंबई हमलावरों के असल ‘मास्टर माइंड’ सरगना हाफिज सईद को सजा दिलाने के इर्द-गिर्द घूम कर रह गयी। यह भारत पाकिस्तान संबंधों ताल्लुकात की विडंबना रही कि जब भी कुछ सुखद नतीजों की आस-उम्मीद बंधती है अथवा ताल्लुकात को बेहतर करने की तरफ दोनों हुकूमतें कुछ कदम उठाती हैं, तो कुछ न कुछ ऐसा घटित हो जाता है, जिससे उम्मीदों पर करारा आघात लग जाता है।  

 

पाक आईएसआई की पहल पर जिस तरह के बर्बर हमले भारत पर किये गए, उसे भारतवासी  कभी विस्मृत नहीं कर सकेगें। परस्पर अविश्वास के बावजूद दोनों देशों के बीच बातचीत बाकायदा जारी रहना चाहिए। याद कीजिए वियतनाम युद्ध का दौर जबकि युद्ध के दौरान भी अमेरिका और वियतमान के मध्य पेरिस में कूटनीतिक बातचीत जारी रही थी। आखिरकार रहमान मलिक के दौरे की एकमात्र शानदार उपलब्धि रही कि वीजा समझौते पर बाकायदा हस्ताक्षर हो गए, जिसके तहत दोनों देशों के बीच आना-जाना यकीनन सरल हो जाएगा। बिना व्यापक सुरक्षा तैयारी के लाखों लोगों की आवाजाही के खतरे बिलकुल नहीं उठाये जा सकते। प्रबल आशंका है कि इस वीजा नियमों की छूट की आड़ में कहीं पाक द्वारा बड़ी तादाद में दहशतगर्द भारत को बाकायदा ‘निर्यात’ न कर दिए जायें। सुखद तथ्य है कि वीजा को उदार करने में भारत-पाक के राजनेता दो कदम आगे तो बढ़े। एक हकीकत है कि दोनों देशों की आम नागरिक एक दूसरे के यहां आने-जाने की विकट ख्वाहिश रखते हैं। इस उपलब्धि के लिए दोनों मुल्कों के उन लाखों एक्टिविस्ट को जोशीला सलाम करना चाहिए, जो विगत 30 वर्षों से वीजा नियमों में छूट देने के लिए संघर्षरत रहे। पिछले साल ही दोनों मुल्कों के राष्ट्रपतियों को एक लाख से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर भेज कर अपील की थी, कि वीजा नियमों में ढील प्रदान की जाए, ताकि ‘पीपुल टू पीपुल कॉन्टेक्ट’ यानी परस्पर नागरिक संपर्क के शानदार समाजवादी नारे को सार्थक बनाया जा सके।  

 

8 सितंबर, 2012 को उस समय के भारतीय विदेशमंत्री एसएम कृष्णा और पाक विदेशमंत्री हिना रब्बानी खार ने  ऐतिहासिक दस्तावेज द्वारा तय किया कि 10 से 50 के जत्थे में छात्र या घरेलू पर्यटक भारत-पाकिस्तान की यात्रा कर सकेंगे। किसी मान्यताप्राप्त ट्रेवल एजेंसी की देखरेख में इस यात्रा की अवधि 30 दिनों के लिए निश्चित होगी। रिश्तेदारों से मिलने या व्यापार के वास्ते, पहले सिंगल एंट्री वीजा तीन महीने के लिए जारी होती रही, लेकिन अब अवधि छह महीने के लिए रहेगी। सिंगल एंट्री वीजाधारक पांच स्थानों पर जा सकेंगे। बड़े उद्योगपतियों और व्यापारियों को सालभर का वीजा और 10 स्थानों पर अनगिनत बार आने-जाने की सुविधा प्रदान की जाएगी। पुलिस को इन व्यापारियों के गन्तव्यों की जानकारी उनके प्रतिनिधि देते रहेंगे। पांच लाख तक का व्यापार करनेवाले मध्यम व्यापारियों को एक साल का वीजा और चार स्थानों पर प्रवेश की छूट रहेगी। दोनों देशों के परिवारों को दो वर्षो के लिए अनगिनत बार प्रवेशवाले ‘मल्टीपल एंट्री वीजा’ प्रदान किया जा सकेगा। 65 साल से ऊपर के बुजुर्गो को और 12 साल से कम उम्र के बच्चों को वाघा-अटारी सीमा पर ही 45 दिनों के लिए वीजा हासिल हो जाएगा और उन पर थानों पर हाजिरी देने दरकार नहीं आयद होगी। लेकिन सब कुछ इतना सहज-सरल नहीं है। आतंकवाद के मामले में पाकिस्तान के बेहद खराब ट्रैक रिकार्ड को देखते हुए कोई कैसे मान लें कि फिर कोई और अजमल कसाब भारत की ओर रुख नहीं करेगा? सबसे मुश्किल पहलू है कि हमारी सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी अत्यधिक विस्तारित हो जाएगी।

 

(पूर्व सदस्य नेशनल सिक्योरिटी एडवाईडरी कॉऊंसिल)

       ************************************************************************************